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पाकिस्तान मुर्दाबाद नारों के बीच पंचतत्व में विलीन हुए शहीद रोहित यादव

18 मई घाटी में आतंकियों से मुठभेड़ में कानपुर देहात के शहीद जवान रोहित यादव का पार्थिव शरीर जैसे ही घर पहुंचा, चारों तरफ पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगने लगे। वहां मौजूद भीड़ की आंखों में शहादत का बदला लेने का आक्रोश झलक रहा था। शहीद के परिजन पार्थिव शरीर से लिपटकर चितकार मारकर रोने लगे। इस बीच पत्नी व मां बेहोश हो गई। जिन्हें मौजूद महिलाओं ने संभालते हुए ढांढस बंधाया।
कानपुर देहात जनपद के डेरापुर निवासी गंगा सिंह यादव सेना से रिटायर्ड है। इनका बड़ा बेटा रोहित यादव 2011 में 16वीं राजपूत रेजीमेंट में भर्ती हुआ था। इन दिनों वह घाटी के शोपियां सेक्टर में 44वीं राष्ट्रीय रायफल बटालियन में तैनात थे। दो दिन पूर्व गुरुवार को पुलवामा में डेलीपुरा इलाके में सुरक्षाबलों की आतंकियों की घेराबंदी के बाद मुठभेड़ हुई। जिसमें देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के गृह जनपद में रहने वाला जवान रोहित बड़ी बहादुरी से आतंकियों की गोली का जवाब देते हुए शहीद हो गया। लगभग रोहित की शहादत की खबर मिलने के बाद शनिवार को 42 घंटे बाद दोपहर पार्थिव शरीर उनके आवास पहुंचा। रास्ते में जिस किसी ने भी जवान के पार्थिव शरीर को सेना की गाड़ी में देखा वह खड़ा होकर ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाते हुए नमन करने लगे।
पार्थिव शरीर को देखते ही डेरापुर में उमड़ी भीड़ ने पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाकर गमगीन माहौल के बीच बदला लेने की आग दिखने लगी। परिवार के सदस्यों के साथ रिश्तेदारों को किसी तरह से संभालते हुए शहीद की अंतिम यात्रा निकली। यात्रा के दौरान हजारों लोगों की चल रही भीड़ की आंखों के आंसुओं में सरकार से जवान रोहित यादव की शहादत का जल्द बदला लेने का निशब्द माहौल साफ झलक रहा था। जवान का पार्थिव शरीर उनके खेतों में राजकीय सम्मान के साथ सेना, जिला व पुलिस प्रशासन के अफसरों के साथ राजनीतिक दलों के आए नेताओं व भीड़ के सामने हुआ। पार्थिव शरीर को मुखाग्नि छोटे भाई सुमित ने नम आंखों से दी और सदा-सदा के लिए जवान रोहित का शव पंचतत्व में विलीन हो गया।
।।कानपुर व कानपुरदेहात से रामजी मिश्रा की रिपोर्ट।।

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