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गणेश पूजन में तुलसी निषेध:- बाबा-भागलपुर, अध्यात्मिक सम्पादक, जानकारी जंक्शन

गणेश पूजन में तुलसी निषेध:- बाबा-भागलपुर, अध्यात्मिक सम्पादक, जानकारी जंक्शन

कोई भी काम शुरू करने से पहले श्री गणेश जी का नाम लिया जाता है। वहीं पूजा में तुलसी दल/ पत्ता का प्रयोग भी महत्वपूर्ण माना जाता है। लेकिन भगवान गणेश की पूजा में कभी तुलसी का प्रयोग नहीं किया जाता है। एक पौराणिक कथानुसार:- एक बार तुलसी नदी के किनारे टहल रही थी, वहाँ भगवान गणेश गंगा किनारे तपस्या कर रहे थे। भगवान गणेश ने अपने शरीर पर चंदन लगा रखा था। जब तुलसी ने गणेश जी को इस तरह देखा तो आकर्षित हो गई और उन्हें अपना पति चुनने का फैसला किया। लेकिन गणेश जी तपस्या में लीन थे, जिसके कारण तुलसी कुछ बोल नहीं सकी। अपने दिल की बात बताने के लिए तुलसी ने भगवान गणेश का ध्यान भंग कर दिया। ध्यान भंग होने के बाद तुलसी ने गणेश जी को अपने दिल की बात बताई। तुलसी की बात सुनकर गणेश जी ने बड़ी शालीनता से उनके प्रस्‍ताव को अस्‍वीकार कर दिया। गणेश जी ने कहा कि वो उस लड़की से शादी करेंगे, जिसके गुण उनकी माता पार्वती जैसे हों। गणेश जी की बात सुनकर तुलसी दुखी हुई और उन्हें गुस्सा आ गया। तुलसी ने इसे अपना अपमान समझा। तुलसी ने गणेश जी को श्राप दिया कि उनकी शादी उनकी इच्छा के बिलकुल विपरीत होगी। साथ ही श्राप दिया कि तुम्हारी दो शादियां होंगी। तुलसी की बात सुनकर गणेश जी को गुस्सा आ गया और उन्होंने तुलसी को श्राप दिया कि तुम्हारा विवाह किसी राक्षस से होगा। गणेश जी के श्राप से तुलसी को अपनी गलती का अहसास हो गया और उन्होंने भगवान गणेश से माफी मांग ली। माफी मांगने के बाद गणेश जी का क्रोध शांत हुआ तो उन्होंने कहा कि तुम्हारा विवाह शंखचूर्ण नाम के राक्षस से होगा। साथ ही भगवान गणेश ने कहा कि तुम श्रीकृष्ण और भगवान श्रीविष्णु जी की प्रिय मानी जाओगी। कलयुग में तुम जीवन और मोक्ष देने वाली बनोगी। इन सबके बाद भी गणेश पूजा में तुलसी दल नहीं चढ़ाई जाती। गणेश पूजा में तुलसी दल / पत्ता का प्रयोग अशुभ माना जाता है।

गुरु कृपा केवलम्।

जय माँ जय माँ जय जय माँ।

           हo/

(दैवज्ञ पंo आरo केo चौधरी)
“बाबा-भागलपुर”
भविष्यवेत्ता एवं हस्तरेखा विशेषज्ञ
संस्थापक
ज्योतिष योग शोध केन्द्र, बिहार।
मोबाईल नo:- 09430815864/
09835070591

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